Chalo chalen Maan - Jagrati (1954 ) चलो चलें माँ - जाग्रति (1954)

Channel: Mukesh Kundan Thomas

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ये महान कवि प्रदीप जी का गीत है, जाने क्यों मुझको ऐसा मेहसूस होता है जैसे..... कवि प्रदीप ने फ़िल्म को लक्ष्य कर ये गीत लिखा ही नहीं, बल्कि ऐसा लगता है कि जैसे वे ख़ुद अपनी माँ से अपनी बात कहना चाह रहे हों. ये माँ के सर्वदा सुखपूर्वक साथ की स्वप्निल आश्वस्ति और कामना और उसे खो देने के संभावित भय से भरा गीत है जो कवि के ह्रदय और उसकी आत्मा में समा न सका और बाहर बह गया. ये अपनी माँ के लिए कवि प्रदीप की आत्मा से झरा गीत है जिसे उन्होंने शब्दों के माध्यम से बटोरा भर है.
जब भी मैं ये गीत सुनता हूँ बदन में जैसे झुरझुरी सी दौड़ जाती है, मैं घबरा जाता हूँ, एक डर सताने लगता है, गीत को बंद कर देने का मन होता है पर............पर ....हिम्मत नहीं होती कि इसे बीच में बंद कर दूँ. माँ से बिछुड़ने उसे खो देने की कल्पना मात्र से मन घबरा उठता है.
मित्रो, ये गीत सुनने के बाद अगर आपकी आँखें भी नम हो जाएँ तो ..........अपने आप को ख़ुशकिस्मत समझिएगा कि आप को माँ का प्यार मिला और ये भी कि .....
आप उस प्यार की क़द्र करते हैं.

(Song from - Jagrati (1954) A non commercial presentation )
Music - Hemant Kumar Lyric - Pradeep Singer- Asha Bhonsle